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#बुन्देलखण्ड : ऐसी प्रतिभा जिसे देखकर आप रह जायेंगे दंग , ये है असल गुदडी का लाल !

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चित्रकूट /  कहते है पूत के पाँव पालने में ही दिख जाते है  दोस्तों आज में आपको एक ऐसे ही लड़के के बारे में बताने वाला हूँ  जिसकी उम्र सिर्फ 14 साल है और वह कक्षा 9 का छात्र है लेकिन उसके कारनामे वाकई में काबिले तारीफ़ है । इस लड़के के कार्य देखकर बड़े बड़े वैज्ञानिकों को चक्कर आ सकता है । आपको यकीन नही होगा की इस उम्र का कोई लड़का क्रेन मशीन , मूर्तियां बना सकता है । लेकिन आपको हमारी बात पर यकीन करना होगा क्योंकि ये सच है ।   जी हां तीर्थराज पुरी ,सीतापुर (चित्रकूट) का निवासी  अभिषेक गुप्ता जिसकी उम्र महज 14 वर्ष है उसने महज इतनी छोटी सी उम्र में क्रेन मशीन बनाई है जो देखने को में तो काफी छोटी है लेकिन ठीक वैसे ही कार्य करती है जैसे कोई बड़ी क्रेन मशीन । अभिषेक ने जो क्रेन मशीन बनाई है उसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि उसमे पार्ट्स के रूप में सभी दैनिक दिनचर्या के उपयोग की वस्तुएं हैं । चाहे वो मशीन में प्रेशर के लिए प्रयोग किया गया सीरेंज हो या पहियों में लगाया गया रबर का पट्टा । अभिषेक की बनाई क्रेन मशीन हूबहू वैसे ही कार्य करती है जैसे एक बडी मशीन । अभिषे...

जलियावाला बाग कांड : एक ऐसी घटना जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला

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आलेख - अनुज हनुमत   13 अप्रैल को देश भर में वैसाखी का त्यौहार बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है, लेकिन 1919 का जलियांवाला बाग़ काण्ड भी इसी दिन से जुड़ा हुआ है, जिसने समूचे भारत को हिला कर रख दिया था। जलियांवाला बाग अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास का एक छोटा सा बगीचा है, जहां 13 अप्रैल 1919 को ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने गोलियां चला के निहत्थे, शांत बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों को मार डाला था और हज़ारों लोगों को घायल कर दिया था। अंग्रेजी सेना की कार्रवाई के बाद दो दिनों तक इन शहीदों के शव घटना स्थल पर ही पड़े रहे| जिसके बाद बाग़ से 1200 से 1500 लोगों के शव बरामद किये गए, जबकि बाग़ के कुँए से कम से कम 120 लाशें निकाली गई|   यदि किसी एक घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था, तो वह घटना यह जघन्य हत्याकाण्ड ही था। इसी घटना की याद में यहां पर स्मारक बना हुआ है। गोलीबारी में हुए मृत लोगों की संख्या को लेकर विवाद है। नरसंहार की ब्रिटिश जांच के बाद जो आंकड़े जारी हुए, उसके अनुसार मृ...

कांग्रेस सरकार की असफलता का जीता जागता स्मारक : बुन्देलखण्ड की बरगढ़ ग्लास फैक्ट्री

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"दशकों  से बंद है बुन्देलखण्ड की इकलौती ग्लास फैक्ट्री"   बरगढ़ / चित्रकूट        देश का एक ऐसा हिस्सा जहाँ का प्रत्येक गाँव भूख और आत्महत्याओं की दुःख भरी कहानियों से भरा पड़ा है । बुन्देलखण्ड के विकास पर पानी की कमी , भूमि अनुपजाऊ और जनप्रतिनिधियों की असक्रियता तीनों एक साथ प्रहार करते आये हैं । ऐसी ही दशकों पुरानी एक कहानी  बुन्देलखण्ड की इकलौती ग्लास फैक्ट्री की है जिसका शिलान्यास दशकों पहले कांग्रेस की सरकार में हुआ था लेकिन आज तक ये चालू नही हो पाई । जिससे पाठा सहित बुन्देलखण्ड के हजारों मजदूरों का नुकसान हुआ ।  राज्य मिनरल्स डेवलपमेंट कार्पोरेशन के अंतर्गत आने वाली ये फैक्ट्री चित्रकूट जिले के बरगढ़ क्षेत्र में आती है जिसका शिलान्यास सन 1987 में देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कर कमलों द्वारा हुआ था । बुलेट प्रूफ कांच बनाने वाली बुन्देलखण्ड की इस इकलौती ग्लास फैक्ट्री बरगढ़ का निर्माण उप्र राज्य खनिज विकास निगम (यूपीएस एमडीसी) द्वारा सन 1988 में कुछ प्राइवेट सेक्टर के उद्योगपतियों के सहयोग से प्रारम्भ किया गया था । इ...

#बुन्देलखण्ड : इस बार भी बेरंग रही पाठावासियो की होली

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मानिकपुर/ पाठा की धरती तीन दशक से भी ज्यादा समय से सूखे की मार झेल रही है । पिछली बार भीषण बाढ़ ने बहुत नुकसान किया । मुआवजे के नाम पर छोटे छोटे सूखे चेक पीड़ितों को पकड़ाये गये । हर बार की तरह खाने के लिए अन्न ज्यादा मात्रा में न पैदा होने के कारण किसानों का ये रंग बिरंगा होली का त्यौहार भी बेरंग ही साबित हुआ । हालत इतनी ख़राब है की गाँवो में पसरा सन्नाटा , घरों में लटके ताले , सूखे पड़े खेत, सूखी नदियाँ, खाली पड़े खूंटे  सारी स्थिति बयां कर रहे हैं ।  कुछ किसानों का कहना था की सोंचा था कि इस बार बारिश अच्छी हुई है तो हँसी खुशी होली मनाएंगे पर स्थिति ज्यादा अच्छी नही रही । सरकारी अमला कुछ भी कहे लेकिन तस्वीरें सब बयां कर रही हैं ।अधिकांश गाँवों में ज्यादातर घर सुनसान पड़े हैं जिसमे एक दुक्का बूढ़े माँ बाप रह रहे हैं और उनमे से ज्यादातर लोग बाहर पलायन कर चुके हैं । पलायन करने वालों में नौजवानों की संख्या काफी ज्यादा है ।  गौरतलब है कि होली का त्यौहार खुशियों लेकर आता है । सभी को आशा रहती है की खुशियों के अलग अलग रंग देखने को मिलेंगे पर यहाँ तो सिवाए निराशा के कोई ...

रिपोर्टिंग के दौरान मारकुंडी के जंगल मे मिले हजारों साल पुराने सभ्यता के निशान

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                               मारकुंडी/चित्रकूट      पाठा क्षेत्र के बीहड़ इलाकों मे रिपोर्टिंग दौरान मुझे और मेरी टीम को मारकुंडी और टिकरिया के बीच पड़ने वाले बड़पथरी के जंगलों हजारों साल पुरानी सभ्यता के कुछ और निशान मिले जो कि एक बड़ी खोज साबित हो सकती है ! इस स्थान पर जो शैलचित्र मिले वो एक बड़े शैलाश्रय पर बने थे । ये हमे अब तक प्राप्त सभी शैलचित्रों में सबसे अनोखा और  खास लगा क्योंकि इसमें बने शैलचित्र जानवरों की लड़ाई से सम्बंधित हैं । इसमें मानव सभ्यता के शुरुआती दौर के कई राज छिपे हो सकते हैं ।  गौरतलब हो कि इससे पहले भी मैंने अपनी रिपोर्टिंग के दौरान सरहट , बांसा ,चूही और करपटिया के आस पास बड़ी संख्या में शैलचित्र प्रकाश में लाये थे ।  आपको बता दें कि मारकण्डेय आश्रम से कुछ ही दूरी पर बगहा जंगलों में एक विशाल शैलाश्रय (चट्टान) पर आदि मानव द्वारा बनाए गये शैलचित्र काफी मात्रा मे मौजूद हैं। मैंने इन शैल चित्रों को प्रकाश में लाकर उन्हें सरंक्षित करने हेतु पीएमओ...

मानिकपुर के सैकड़ो वर्ष पुराने थाने में धूमधाम से मनाया गया शहीद दिवस

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रिपोर्ट - अनुज हनुमत मानिकपुर/चित्रकूट         आज शहीद दिवस के मौके पर मानिकपुर विकास मोर्चा द्वारा नगर स्थित सैकड़ो वर्ष पुराने थाने (ब्रिटिश कालीन थाना जहाँ किसानों-मजदूरों को फांसी दी जाती थी) में भारत माता के अमर सपूतों - 'शहीद भगत सिंह -सुखदेव-राजगुरु' का बलिदान दिवस मनाया गया । मानिकपुर विकास मोर्चा विगत कई वर्षों से लगातार इस शहीद स्थल पर शहीद दिवस मनाता आ रहा है । गौरतलब हो कि देश की आजादी के लिए अपनी जान की बाजी लगने वाले अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव को 23 मार्च 1931 को अंग्रेजों ने फांसी दे दी थी। इस अवसर पर आज पीएम मोदी ने भी ट्वीट कर शहीदों को याद किया। उन्होंने लिखा कि देश उनके बलिदान और साहस को कभी नहीं भूल सकता।  सबसे खास बात यह है कि भारत माता के अमर सपूत जिन्होंने देश की आजादी के खातिर अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया उनसे जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को सहेजने की जरूरत है । ऐसे ही अंग्रेजों के समय की जेल मानिकपुर में थी जो आज सरकार की उदासीनता के चलते लगभग धूल धूसरित हो गया है । इन्ही में से एक मानिकपुर ब्लाक संसाधन केंद्र के...

जब निरीक्षण के दौरान खुद परिवहन मंत्री ने बस में चढ़कर आम यात्रियों से पूछी उनकी समस्याएँ

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रिपोर्ट - अनुज हनुमत  लखनऊ / ऐसा नजारा बहुत ही कम देखने को मिलता है जब जनता के सेवक (मंत्री , प्रशासनिक अधिकारी) अपने वातानूकुलित चैम्बर से निकलकर जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएँ सुनते दिखे । लेकिन कभी कभार कुछ जनसेवक अपने सादगी भरे कार्यों से जनता के दिल में स्वतः अपनी जगह बना लेते हैं । ऐसा ही एक नजारा कल उत्तर प्रदेश के नवनियुक्त राज्यमंत्री (परिवहन विभाग) स्वतंत्रदेव सिंह ने अचानक परिवहन विभाग से सटे बस अड्डे में पहुंचकर औचक निरीक्षण के दौरान पेश किया । उन्होंने निरीक्षण के दौरान परिवहन मंत्रालय के अन्तर्गत आरटीओ विभाग में कर्मचारियों एवं अधिकारियों से वार्तालाप एवं मिलने के बाद केसरबाग़ बसअड्डे जाकर बसों एवं बस अड्डे का निरीक्षण किया | साथ ही उन्होंने आरटीओ के अधिकारियों से मिलकर स्थिति का जायजा भी लिया |  शाम तक जैसे ही ये सूचना उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट में डाली वैसे ही देखते ही देखते लोगो ने शेयर करना शुरू कर दिया । कुछ लोगों ने पोस्ट शेयर करते हुए तो यहाँ तक लिख डाला कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी परिवहन मंत्री ने बस में चढ़कर आम लोग...