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मानिकपुर के सैकड़ो वर्ष पुराने थाने में धूमधाम से मनाया गया शहीद दिवस

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रिपोर्ट - अनुज हनुमत मानिकपुर/चित्रकूट         आज शहीद दिवस के मौके पर मानिकपुर विकास मोर्चा द्वारा नगर स्थित सैकड़ो वर्ष पुराने थाने (ब्रिटिश कालीन थाना जहाँ किसानों-मजदूरों को फांसी दी जाती थी) में भारत माता के अमर सपूतों - 'शहीद भगत सिंह -सुखदेव-राजगुरु' का बलिदान दिवस मनाया गया । मानिकपुर विकास मोर्चा विगत कई वर्षों से लगातार इस शहीद स्थल पर शहीद दिवस मनाता आ रहा है । गौरतलब हो कि देश की आजादी के लिए अपनी जान की बाजी लगने वाले अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव को 23 मार्च 1931 को अंग्रेजों ने फांसी दे दी थी। इस अवसर पर आज पीएम मोदी ने भी ट्वीट कर शहीदों को याद किया। उन्होंने लिखा कि देश उनके बलिदान और साहस को कभी नहीं भूल सकता।  सबसे खास बात यह है कि भारत माता के अमर सपूत जिन्होंने देश की आजादी के खातिर अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया उनसे जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को सहेजने की जरूरत है । ऐसे ही अंग्रेजों के समय की जेल मानिकपुर में थी जो आज सरकार की उदासीनता के चलते लगभग धूल धूसरित हो गया है । इन्ही में से एक मानिकपुर ब्लाक संसाधन केंद्र के...

बुन्देलखण्ड का एक ऐसा थाना जहाँ किसान-मजदूरों को दी जाती थी फांसी

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मानिकपुर /चित्रकूट      पहले मैं सोंचा करता था की भगत सिंह जैसे लोग हमारे चित्रकूट में क्यों नही पैदा हुए? लेकिन मैं गलत था की क्योकि ऐसे लोग पैदा भी हुए हैं और भगत सिंह जैसी कुर्बानी भी दी है पर हमने उन्हें पहचाना नही । उन्हें फाँसी पर चढ़ते समय इतना दुःख नही हुआ होगा जितना की आज उनको भुला देने पर होगा । अगर मानिकपुर के पुराने थाने में शहीदों के लिए दिये जलाये गए होते तो आज पठानकोट में शहीद हुए जवानो की चिताएँ न जलानी पड़ती ।   वाकई जिन सपूतों ने देश की स्वतन्त्रता के खातिर हँसते हँसते अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया आज हम उन शहीदों के ऐतिहासिक स्थलों को भी सहेज पाने में असमर्थ हैं । आये दिन समाचार के माध्यम से ये खबरे सामने आती हैं की भगत सिंह ,चंद्रशेखर आजाद,सुखदेव जैसे देश के सपूतों के जन्मस्थल से लेकर ऐसे स्थान जहाँ से उन्होंने देश की आजादी के लिए हुंकार भरी , आज वो सभी स्थान भी सरकार के साथ साथ सामाजिक उपेक्षा के भी शिकार हैं । ये हाल तो लगभग सभी सपूतों के हैं पर कई स्थान ऐसे भी हैं जहाँ अंग्रेजों ने ऐसे कई हजार आम लोगो को फांसी पर लटका दिया क्योकि उन्हे...