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महिला दिवस विशेष -महिला उत्पीड़न के पुरुष जिम्मेदार हैं !

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आज महिला दिवस है और सुबह से ही अधिकांश विद्वानों द्वारा लेखनी के माध्यम से  खूब चिंतन किया जा रहा है । आज के दिन खूब गोष्ठियां और तरह तरह के कार्यक्रम किये जा रहे हैं जिसका आयोजन पुरुषों द्वारा किया जा रहा है और पुरुषों द्वारा ही 'खूब माइक तोड़ाई' भी हो रही है । मेरे व्यक्तिगत विचार हो सकता है की सभी पुरुषों को चुभें पर एक पुरुष होने के नाते मुझे तो बहुत शर्म महसूस होती है। इस पुरुषसत्तात्मक समाज में पुरुष अपनी झूठी शान बनाये रखने के लिए सदैव 'स्त्री' के स्वाभिमान को कुचलता है और फिर कुछ लोग,कुछ कुर्सियों के साथ एक अदद माइक लेकर सजाना शुरू करते हैं उस मंच को जहाँ रचा जाता है इज्जत सहेजने के कार्यक्रम का  'स्वांग' !........  कुछ घण्टे माइक तोड़ने के बाद खुद पुरुष ही कसम खाते हैं की हम हर हाल में महिलायों की सुरक्षा करेंगे । उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करेंगे ।         महिलाओं के उत्पीड़न के लिए ज्यादातर केवल पुरुष ही जिम्मेदार है जिसका सबसे बड़ा कारण 'सोंच का दोहरीकरण' है । अधिकांश ऐसे लोगों की गंदी मानसिकता उनके अपने रिश्तों में देखने को...

पाठा_का_संघर्ष : पाठा के विकास के लिए अंतिम साँस तक जारी रहेगा संघर्ष

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 #पाठा_का_संघर्ष :पाठा क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं । हमारी मुहीम को बड़ी मात्रा में पाठावासियों का जनसमर्थन भी प्राप्त होना शुरू हो गया है । मीडिया (प्रिंट + इलेक्ट्रॉनिक + न्यू मीडिया) का अभूतपूर्व सहयोग प्राप्त हो रहा है । स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को और ज्यादा संवेदनशील होने की जरूरत है क्योंकि बिना आपके समर्थन के मंजिल प्राप्त नही की जा सकती । पाठा में पर्यटन का जितना विकास होगा उतना पाठा का विकास होगा । जहाँ मानव सभ्यता का शुरुआती विकास हुआ हो वो पाठा की पावन भूमि किसी से पिछड़ी क्यों रहे । उसे हक आगे बढ़ने का - उसे हक है उन तमाम सुविधाओं को हासिल करने का जिसे आज आजादी के 70 साल बाद भी हासिल नही कर पाए । हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक पाठा को उसका हक नही मिल जाता ।   ये एक महज चित्र (शैलचित्र) की कहानी नही है बल्कि ये पाठा में पनपी एक बड़ी पुरापाषाणकालीन संस्कृति है और जैसे सिंधु घाटी सभ्यता की खोज बहुत बाद में हुई लेकिन आज वह श्रेष्टतम मानव संस्कृतियों में से एक है ।उसी प्रकार पाठा की ये संस्कृति भी तमाम रहस्य समेटे हुए है और समकालीन पाष...

चित्रकूट में पर्यटन के खुल सकते हैं बड़े द्वार , भारतीय पुरातत्व की टीम ने किये लगातार दो दौरे

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मानिकपुर /चित्रकूट      मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की तपोस्थली चित्रकूट की पावन धरती भारत के मानचित्र पर धार्मिक केंद्र के रूप में तो प्रसिद्द ही थी लेकिन अब बड़े पुरातात्विक स्थलों के रूप में भी स्थान बनाने जा रही है । इसका सबूत है चित्रकूट की धरती पर भारतीय पुरातत्व विभाग के लगातार दो दौरे , जो आने वाले समय में निःसन्देह चित्रकूट के लिए ऐतिहासिक होंगे । भारतीय पुरातत्व विभाग को चित्रकूट के दौरे के लिए मजबूर करने वाले यहीं के एक संघर्षशील युवा पत्रकार अनुज हनुमत ही हैं । जहाँ की दूसरे राज्य की सरकारें अपने अपने यहाँ पर्यटकों को बुलाने के लिए अख़बारों- टीवी पर आक्रामक रूप से प्रयास कर रही हैं । वहीं उत्तर प्रदेश इस मामले में पीछे है । आपने भी बमुश्किल ही उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग का प्रचार टीवी या अखबार पर देखा होगा । इस बीच भारतीय पुरातत्व विभाग -नई दिल्ली के लगातार दो दौरों ने पर्यटन की संभावनाओं पर बुन्देलखण्ड को एक कदम और आगे लाकर खड़ा कर दिया है ।    भारतीय पुरात्तव विभाग की पहली टीम ने उपनिदेशक डॉ. आर सिन्हा के नेतृत्व में चित्रकूट जिले के मानिकपुर तहस...

बुन्देलखण्ड का एक ऐसा थाना जहाँ किसान-मजदूरों को दी जाती थी फांसी

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मानिकपुर /चित्रकूट      पहले मैं सोंचा करता था की भगत सिंह जैसे लोग हमारे चित्रकूट में क्यों नही पैदा हुए? लेकिन मैं गलत था की क्योकि ऐसे लोग पैदा भी हुए हैं और भगत सिंह जैसी कुर्बानी भी दी है पर हमने उन्हें पहचाना नही । उन्हें फाँसी पर चढ़ते समय इतना दुःख नही हुआ होगा जितना की आज उनको भुला देने पर होगा । अगर मानिकपुर के पुराने थाने में शहीदों के लिए दिये जलाये गए होते तो आज पठानकोट में शहीद हुए जवानो की चिताएँ न जलानी पड़ती ।   वाकई जिन सपूतों ने देश की स्वतन्त्रता के खातिर हँसते हँसते अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया आज हम उन शहीदों के ऐतिहासिक स्थलों को भी सहेज पाने में असमर्थ हैं । आये दिन समाचार के माध्यम से ये खबरे सामने आती हैं की भगत सिंह ,चंद्रशेखर आजाद,सुखदेव जैसे देश के सपूतों के जन्मस्थल से लेकर ऐसे स्थान जहाँ से उन्होंने देश की आजादी के लिए हुंकार भरी , आज वो सभी स्थान भी सरकार के साथ साथ सामाजिक उपेक्षा के भी शिकार हैं । ये हाल तो लगभग सभी सपूतों के हैं पर कई स्थान ऐसे भी हैं जहाँ अंग्रेजों ने ऐसे कई हजार आम लोगो को फांसी पर लटका दिया क्योकि उन्हे...

वो 27 फरवरी का मनहूस दिन

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  गोधरा कांड 27 फरवरी 2002 में हुआ था । जिसमें साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन की एक बोगी को बंद कर उसके तमाम यात्रियों को जिंदा जला दिया गया था । इस घटना में 59 लोगों की मौत हुई थी । गोधरा कांड के बाद गुजरात में सांप्रदायिक दंगे हुए थे, जिसके लिए आज भी गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की जाती है । उनपर यह आरोप है कि उन्होंने दंगे के वक्त राजधर्म का पालन नहीं किया । साबरमती एक्सप्रेस की वारदात के बाद गुजरात में हुए दंगों में अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक समुदाय के करीब एक हजार लोग मारे गए ।लेकिन दंगों को लेकर आज भी राजनीति खत्म नहीं हुई है. मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगते रहे हैं कि गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए वह दंगों पर काबू नहीं कर पाए या फिर उन्होंने काबू पाने की कोशिश नहीं की. गोधरा कांड के बाद ही पूरे गुजरात में धार्मिक दंगे भड़क गए थे. अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को मारा गया, महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ और बहुत से बच्चों के सिर से पिता का साया छिन गया । कई इलाकों में बहुसंख्यक समुदाय के लोगों को भी शिकार बनाया गया. पीड़ितों के मकानों और दुकानों क...

खौफ का ख़ात्मा - पाठा में हुआ ऐतिहासिक मतदान

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ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट -                                                                         जिला निर्वाचन अधिकारी मोनिका रानी के नेतृत्व में कई महीनों से लगातार मतदाता जागरूकता को लेकर चलाये जा रहे अभियान का असर कल हुए मतदान में बड़े पैमाने पर देखने को मिला । चित्रकूट जिले के पाठा क्षेत्र में कल मतदान को लेकर ग्रामीण इलाकों के मतदाताओं में काफी उत्साह देखने को मिला । ध्यान देने वाली बात यह है कि केकरामार गाँव के मतदाता जिन्होंने कल सुबह मतदान करने से इंकार किया था लेकिन वहां प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को समझाने के बाद मतदान में तेजी आई और यहाँ भी 50% से अधिक मतदान हुआ । अगर मतदाताओं के रूख की बात करें तो उनका कहना था कि हमने इस बार विकास के लिए वोट किया है और हम चाहते हैं कि हमारी मूलभूत समस्याएं (बिजली ,पानी ,सड़क ,मकान ) दूर हो ।  सभी बूथों में सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था थी । ब...

पांच वर्ष का मौका दीजिये ,हर पैमाने पर स्थितियाँ बदली जाएंगी - पीएम मोदी

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इलाहाबाद / उत्तर प्रदेश में तीसरे चरण का मतदान सम्पन्न हो चुका है और चौथे चरण के मतदान से पहले सभी पार्टियों के बडे नेता धुंआधार रैलियां करने में जुटे हैं । आज इलाहाबाद के फूलपुर में  एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए पीएम नरेन्द मोदी ने प्रदेश के तीनों प्रमुख विरोधी दलों, सपा,बसपा और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा । पीएम मोदी ने कहा कि एक तरफ ये दल अपनी इज्जत बचाने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ बीजेपी प्रदेश के विकास के लिए चुनाव में है ।  रैली को संबोधित करते हुये पीएम मोदी ने कहा कि पूरे यूपी में परिवर्तन की आंधी चल रही है और यूपी के लोग समाजवादी पार्टी के कुशासन से तंग आ चुके हैं । पीएम ने सपा सरकार पर हमला करते हुए कहा कि यूपी अपराध, अत्याचार, भाई-भतीजावाद और शोषण में एक नंबर पर है. शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, रोजगार के नाम पर यूपी सबसे आखिरी कतार में खड़ा है. सपा-कांग्रेस गठबंधन पर प्रधानमंत्री ने कहा कि एक 'यूपी बेहाल करने वाले' और एक 'यूपी बेहाल वाले' का गठबंधन हुआ है. यूपी में भाजपा के लिए पांच वर्ष का मौका मांगते हुए पीएम ने कहा हर पैमाने पर स्थित...