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जरुर पढ़ें हमारे न्यूज पेपर - "विकास" का दूसरा अंक

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साक्षात्कार: शहीद भगत सिंह के प्रपौत्र अभितेज सिंह संधू से

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शहीद भगत सिंह का सपना था की आजादी के बाद एक ऐसा मुल्क बनाएंगे की कोई एक व्यक्ति इतना अमीर नही होगा की किसी को खरीद सके और कोई इतना गरीब न हो की खुद को बेच सके । भगत सिंह की शहादत का आज के वर्तमान समय में कितना असर पड़ा है  ऐसे ही कुछ  प्रश्नो के साथ मैंने बात की भगत सिंह के प्रपौत्र अभितेज सिंह से - प्रश्न.01- आज की युवा पीढी को आप शहीद ए आजम भगत सिंह के कितने करीब पाते हैं ? -देखिए दिली तौर पर तो आज के युवा भगत सिंह के बहुत करीब हैं ।भगत सिंह एक युवा एक रिबेल की निशानी है ,विरोध की भी निशानी हैं ।नौजवान साथी खुद को भगत सिंह जैसा ही समझते हैं पर असल मायने में भगत सिंह को समझने की भी बहुत जरूरत है । प्रश्न.02-आज के समय में आप किस युवा नेतृत्व को भगत सिंह के नजदीक पाते हैं ? -नौजवानों को नेतृत्व पर निर्भर होने की या हर जगह नेतृत्व ढूँढने की जरूरत नही ।हम हमेशा आशा करते हैं की हमें कोई आगे ले जायेगा । एक तर्ज पर जंग ए आजादी लड़ी गई थी तब वो पंक्ति थी 'खुदी को कर बुलन्द इतना की खुदा बन्दे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है'। तो इसके ऊपर पूरी जंगे आजादी लड़ी गई थी तो आज नौजवान...

भारतीय नववर्ष प्रारंभ, परंपरा में सृष्‍टि का आरंभ दिवस, वैदिक कालगणना में बीते अब तक एक करोड़ वर्ष..!

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आज चैत्र प्रतिपदा है। आज से भारतीय नव वर्ष प्रारंभ हो जाएगा। हमने विक्रमी संवत् 2073 को अलविदा कह नये वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं। आज से महीने की शुरुआत तो ही रही है, साथ ही नवदुर्गा की भी शुरुआत हो रही है। भारतीय नववर्ष का पहला दिन यानी सृष्टि का आरम्भ दिवस, युगाब्द और विक्रम संवत् जैसे प्राचीन संवत का प्रथम दिन, श्रीराम एवं युधिष्ठिर का राज्याभिषेक दिवस, मां दुर्गा की साधना चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिवस, आर्य समाज का स्थापना दिवस, संत झूलेलाल जयंती, आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठन के संस्थापक, प्रखर देशभक्त डॉ केशवराव हेडगेवार जी जन्मदिवस। वास्तव में ये वर्ष का सबसे श्रेष्ठ दिवस है। हिन्दू नववर्ष का प्रारम्भ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है। ब्रह्मपुराण के अनुसार पितामह ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टिनिर्माण प्रारम्भ किया था, इसलिए यह सृष्टि का प्रथम दिन है। इसकी काल गणना बड़ी प्रचीन है। सृष्टि के प्रारम्भ से अब तक 1 अरब, 95 करोड़, 58 लाख, 85 हजार, 111 वर्ष बीत चुके हैं। यह गणना ज्योतिष विज्ञान के द्वारा निर्मित है। आधुनिक वैज्ञानिक भी सृष्टि की उत्‍पत्‍ति का समय...

आज शहीद दिवस विशेष 08 अप्रैल :मंगल पांडेय

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 " हम है इसके मालिक, हिन्दुस्तान हमारा, पाक वतन है कौम का, जन्नत से भी प्यारा। ये है हमारी मिल्कियत, हिन्दुस्तान हमारा, इसकी रू हानियत से, रौशन है जग सारा; कितना कदीम कितना नईम, सब दुनिया से न्यारा, करती है जरखेज जिसे, गंगो-जमन की धारा।"       (सन 1857 में राष्ट्रध्वज की सलामी के समय जगह-जगह में यह गीत गाया जाता था। मूल गीत 57 क्रांति-अखबार च् पयामे-आजादी छ में छपाया गया था। जिसकी एक नकल ब्रिटिश म्युजियम लंदन में आज भी मौजूद है।)     ब्रितानी हुकूमत के खिलाफ जंग और आजादी का ख्याल आते ही कई नाम और चेहरे बरबस याद आ जाते हैं। एक लंबी लड़ाई, हजारों कुर्बानियां और तमाम जुल्मों-सितम के बाद हिन्दुस्तान 15 अगस्त 1947 की आधी रात अंग्रेजों से मुक्त हो गया था। एक लंबे समय से गुलामी की बेडिय़ों में जकड़े भारतीय समाज को खुली हवा में सांस लेने का मौका मिला तो हर ओर बस जश्न का माहौल था। हर कोई आजादी के मतवालों को याद कर रहा था जिनके बलिदान से भारतीयों को मुक्ति मिली थी। मंगल पांडेय भी उन्हीं क्रांतिकारियों में से एक थे। आज उनका शहदत...

सुबह सुबह संगम नगरी का दृश्य .....

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#‎ MyClick‬ सुबह सुबह संगम नगरी का दृश्य ..... ‪#‎ Photography‬

यूपी में भाजपा को भरनी होगी युवा नेतृत्व के साथ वही पुरानी उड़ान ,सुधारनी होगीं ये गलतियाँ

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पिछले कुछ दिनों से देख रहा हूं कि यूपी में भाजपा अपने संगठनात्मक फेरबदल को लेकर काफी व्यस्त थी और मंडल स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक बड़ी मात्रा में युवाओं की दावेदारी ने पार्टी आलाकमान की मुश्किलें और भी बढ़ा दी हैं, क्योंकि पार्टी के सामने सबसे बड़ी समस्या ये है की किसको ज्यादा तवज्जो दे_'पार्टी के पुराने सिपाहियों को' या 'पार्टी के नये सिपाहियों को' । दरअसल पार्टी में इस समय दो धड़े हैं, एक वह जिसका नेतृत्व पार्टी के बुजुर्ग नेता कर रहे हैं और जिन्होंने पार्टी की नींव को अपने खून-पसीने से सींचा है और जो किसी भी हालत में अपनी जगह नही गंवाना चाहते और दूसरा धड़ा उन नौजवानों का है, जिसका नेतृत्व पिछले लोकसभा चुनावो में अपनी चमक बिखेरने वाले 'युवा' कर रहे हैं, वे इसी दरवाजे से अब सक्रीय राजनीति में मजबूती से दाखिल होना चाहते हैं। यूपी में  चल रहे भाजपा के संगठनात्मक चुनावों की स्थिति यही नहीं ठहरती, बल्कि अभी और भी पेंच सामने आ रहे हैं, जिसमें मंडल स्तर और जिले स्तर में 'जातिवाद' का जहर भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जिसमें कार्यकर्ता अपने पारस्परिक व्यवहा...

" प्रेम तो गीत है मधुर आत्मा से गाये जाओ."

   कहते हैं प्रेम की न तो कोई परिभाषा होती है न तो इसे किसी प्रकार के बन्धन से बांधा जा सकता है । प्रेम तो वो एहसास जो दो दिलों को आपस में जोड़ता है । इसमें आकर्षण नही होता है बल्कि समर्पण का ऐसा भाव होता है जिसमे डूबकर प्रेम करने वाला सबकुछ अर्पण कर देता है । प्रेम का कोई आकार नही होता न तो प्रेम दोनों हांथो से समेटा जा सकता है । हाँ प्रेम में एक स्वार्थ होता है जिसके द्वारा प्रेम करने वाला अपने प्रिय को अपने पास सहेज कर रखना चाहता है जिसे गलत नही कहा जा सकता है। ऐसी ही एक प्रेमिका थी कृष्णभक्त मीराबाई जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन कृष्ण भक्ति में लगा दिया ।   मीरा बाई जिनका जन्म राव रत्न सिंह के घर 23 मार्च 1498 ई को हुआ था । बचपन में एक विवाह समारोह के दौरान मीरा ने अपनी माँ  से पूछा की मेरा पति कौन होगा ? उनके द्वारा बार-बार पूछे जा रहे इस सवाल से परेशान माँ ने भगवान् श्रीकृष्ण का ना ले लिया ।    इसके बाद मीरा ने उन्हें दिल से पति रूप में स्वीकार कर लिया । माता पिता की मृत्यु के पश्चात् उनका विवाह चित्तौड़ के प्रतापी राजा राणा सांगा के भाई भोजराज से ...