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Showing posts from 2017

विशेष रिपोर्ट - 'बुन्देलखण्ड का लाल जहर'

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पढिये अनुज हनुमत की विशेष रिपोर्ट -   "बुन्देलखण्ड का लाल जहर"

विश्व आदिवासी दिवस : "आजादी के 70 वर्ष बाद भी पाठा का आदिवासी क्षेत्र विकास की मुख्य धारा से नही जुड़ा" ।कभी आपने सोंचा ऐसा क्यों ?

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🎯 विश्व आदिवासी दिवस (09 अगस्त) : चिंतन का वक्त है कि आदिवासी समाज कहाँ खड़ा है ? 📌 आशा है कि वर्ष में किसी एक दिन तो हमारे आदिवासी भाइयो की सुनी जायेगी ? आज विश्व आदिवासी दिवस पर हमारी मांग है कि चित्रकूट जिले के बहिलपुरवा क्षेत्र में एक अस्पताल खोला जाये जिससे गरीब और असहाय लोगों का इलाज हो सके ।  (रिपोर्ट - अनुज हनुमत)  विश्व अादिवासी दिवस ( 09 अगस्त) के माैके पर यह चिंतन का वक्त है कि आदिवासी समाज कहां खड़ा है ? जल, जंगल और जमीन आरंभ से आदिवासी जीवन से जुड़ा रहा है. समय के साथ-साथ बदलाव हुए हैं आैर यह समाज भी बदला है.  अंगरेजाें के खिलाफ अगर आदिवासियाें ने हथियार उठाये थे, ताे इसका एक बड़ा कारण जमीन था. आज भी जमीन का मुद्दा आदिवासियाें के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है. इस समाज के सामने बड़ी चुनाैती है कि विकास का मॉडल क्या हाे जिससे वे पिछड़े भी नहीं आैर उनकी संस्कृति भी सुरक्षित रहे । इस वर्ष 24वां विश्व आदिवासी दिवस पूरे विश्वभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। आज ही के दिन संयुक्त राष्ट्रसंघ ने दुनियाभर के आदिवासी समाज के मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए प्रस्ताव प

#मेरी कलम से :जब पुलिस के आला अफसर ने रखा बुन्देलखण्ड के सबसे पिछड़े इलाके में कदम और तब ..

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  #मिलनसार_IPS : दो दिन पहिलेअपर पुलिस महानिदेशक (इलाहाबाद जोन) एस. एन. साबत चित्रकूट दौरे पर आये थे । अपने आला अधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद वो बुन्देलखण्ड के सबसे संवेदनशील (दस्यु प्रभावित इलाका) क्षेत्र बहिलपुरवा पहुंचे जहां जाने से लगभग हर विभाग का आला अधिकारी एक बार सोंचता है ।  अधिकारी ही नही बल्कि जनप्रतिनिधि भी इस क्षेत्र में यदा कदा ही जाते हैं । उन्होंने क्षेत्र का दौरा ही नही किया वरन चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनी और प्राथमिक विद्यालय में जाकर बच्चो से भी रूबरू हुए । पूरे दौरे के दौरान लगातार मैं उनके साथ रहा । मुझे सबसे ज्यादा जिस पल ने प्रभावित किया वो था उनका बच्चो को क्लास में जाकर पढ़ाना । क्लास में टीचर द्वारा उस वक्त ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के बारे में पढ़ाया जा रहा था । उन्होंने बच्चो से कई प्रश्न किये जिसका पाठा के बच्चो ने बखूबी जवाब दिया । उन्होंने जब बच्चो से पूछा की आप कितनी दूर से स्कूल आते हो तो कुछ बच्चो ने बताया कि 8-10 किमी से पैदल पढ़ाई के लिए आते हैं । बच्चो की बाते सुनकर वो काफी प्रभावित हुए । उन्होंने फिर पूरे 10 मिनट तक बच्चो को श्यामपट में

बुन्देलखण्ड में नक्सलियों की दस्तक का दस्यु कनेक्शन ! प्रशासन ने कहा हमारे पास ऐसा कोई इनपुट नही

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विशेष रिपोर्ट - अनुज हनुमत    बुन्देलखण्ड दशकों से सूखे और पलायन जैसी समस्यायों से जूझता रहा है जिसने यहाँ के मूलभूत ढांचे को बुरी तरह से बर्बाद कर दिया है । आजादी के 70 साल बाद आज भी यहाँ गाँवो में लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं । इस क्षेत्र का जितना नुकसान डकैतों ने नही किया उससे ज्यादा नुकसान यहाँ के भू माफियाओं और बालू माफियाओं ने किया । यूँ कहें की दोनों का चोली दामन का साथ रहा तो गलत नही होगा । इतनी समस्याएं और चारो तरफ लूट, खौफ का माहौल होने के बावजूद इस क्षेत्र में कभी भी नक्सली मूवमेंट देखने को नही मिला ।  कुछ थोड़े बहुत नक्सली मूमेंट की सूचना दशकों पहले बरगढ़ और मानिकपुर क्षेत्र में सुनने में आई  था लेकिन समय के साथ ये बातें भी धूमिल हो गई । पिछले कुछ महीनों से विश्वस्त सूत्रों के हवाले से कुछ दस्यु गिरोहों के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जाने की खबर मिल रही है । अब इस खबर में कितनी सच्चाई है ये तो जाँच का विषय है लेकिन अगर इसमें एक प्रतिशत भी सच्चाई है तो ये काफी गंभीर मसला है । फिलहाल पुलिस प्रशासन का कहना है कि हमे ऐसा कोई इनपुट नही प्राप्त हुआ है ।  हा

TET की तर्ज पर ही लागू हो LET और JET

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मेरी मांग : TET की तर्ज पर ही लागू हो LET और JET अब पत्रकार पात्रता परीक्षा (JET) की जरूरत आन पड़ी है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को प्रेषित पत्र में मैंने केंद्र सरकार से मांग की है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की तर्ज पर ही नेताओ के लिए 'नेता पात्रता परीक्षा '(LET) और पत्रकारों के लिए 'पत्रकार पात्रता परीक्षा' (JET) लागू की जाये । राजनीति और पत्रकारिता दोनों का स्तर सुधारने में भारी मदद मिलेगी । + यह मेरी व्यक्तिगत मांग है जरूरी नही की आप सहमत ही हों । धन्यवाद .. √ अनुज हनुमत ©Copyright मो. 09792652787

मदद : RPF स्टाफ ने की बच्चे की मदद , डॉक्टर को बुलाकर कराया इलाज

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छिवकी / इलाहाबाद   कल्पना करिये की अगर आपकी या आपके बच्चे की तबियत ट्रेन में सफर के दौरान ख़राब हो जाये और आपको फौरन मदद मिल जाये तो कैसा महसूस करेंगे ! जी हां आपको ऐसी स्थिति में मदद करने वाले किसी फ़रिश्ते से कम नही लगेंगे । ऐसा ही वाकया  कल शाम छिवकी स्टेशन में देखने को मिला । नैनी RPF उपनिरीक्षक अमित द्विवेदी अपने  हमराह कांस्टेबल बालकिशन के साथ छिवकी स्टेशन में नियमित ट्रैन चेकिंग कर रहे थे। शाम के लगभग 19.20 बजे का समय हो रहा था और तभी गाड़ी संख्या 9051 बलसाड़ छपरा एक्सप्रेस आकर खड़ी हुई ।   ट्रेन में विकलांग कोच को चेक करने के क्रम में एक महिला यात्री जो कि बलसाड़ से छपरा तक के लिए यात्रारत थी उसने बताया कि उसके बच्चे की तबियत बहुत खराब है जिस पर उपनिरीक्षक अमित द्विवेदी ने फौरन अपने  RPF स्टाफ को भेजकर प्राइवेट डाक्टर को बुलाकर बच्चे का इलाज करवाया एवं दवाई भी  दिलवाई।ध्यान देने वाली बात यह है कि महिला के पास दवाई के पैसे भी नही थे जिसे RPF स्टाफ द्वारा दिया गया। कोच में बैठे अन्य यात्रियों ने आरपीएफ टीम को धन्यवाद दिया देते हुए उपनिरीक्षक अमित द्विवेदी को सैल्यूट करते करत

मेरे अंदर के पाठक ने मुझे लेखक बनाया....

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 # मुलाक़ात : लेखिका छाया सिंह  अभी जल्दी ही आपसे जुड़ा । आपकी कहानियां पढ़ीं । इसी बीच आपकी लिखी कहानी पर बनी लघु फिल्म 'और्जित्या' भी देखी । आज आपसे मुलाक़ात भी हो गई । जैसी मिठास और सरलता आपकी लेखनी में है वैसे ही आपका स्वाभाव । कई विषयो पर आपसे बातचीत हुई । सबसे खास बात यह रही की हर विषय में आपकी सोंच सकारात्मक थी जो की अद्वितीय है । आपकी मेहमाननवाजी ने तो पेट से ह्रदय तक भर दिया । बुन्देलखण्ड में पिछले कई दशक से गद्य विधा मर सी गई थी लेकिन आपकी कहानियो ने उसे पुनः जीवित कर दिया । बुन्देलखण्ड कनेक्ट मैगजीन के मई माह के अंक में आपकी कहानी 'बनफूल' पढ़ी थी । आपकी कहानियों में सरलता है सहजता है जो पाठक को बांध लेता है । आज की मुलाकात बहुत ही कम समय की थी लेकिन आपके बारे में खुद आपसे काफी जानने और समझने को मिला । अभी भी मुझे याद है जब आपने कहा कि 'मेरे अंदर के पाठक ने मुझे लेखक बनाया' । सच में खुद का ये भावनात्मक एहसास अदभुत है । समाज में एक लोकोक्ति प्रसिद्द है कि 'एक अच्छा श्रोता ही एक अच्छा वक्ता'होता है उसी प्रकार एक अच्छा पाठक ही एक अच्छा लेखक होता

#बुन्देलखण्ड : ऐसी प्रतिभा जिसे देखकर आप रह जायेंगे दंग , ये है असल गुदडी का लाल !

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चित्रकूट /  कहते है पूत के पाँव पालने में ही दिख जाते है  दोस्तों आज में आपको एक ऐसे ही लड़के के बारे में बताने वाला हूँ  जिसकी उम्र सिर्फ 14 साल है और वह कक्षा 9 का छात्र है लेकिन उसके कारनामे वाकई में काबिले तारीफ़ है । इस लड़के के कार्य देखकर बड़े बड़े वैज्ञानिकों को चक्कर आ सकता है । आपको यकीन नही होगा की इस उम्र का कोई लड़का क्रेन मशीन , मूर्तियां बना सकता है । लेकिन आपको हमारी बात पर यकीन करना होगा क्योंकि ये सच है ।   जी हां तीर्थराज पुरी ,सीतापुर (चित्रकूट) का निवासी  अभिषेक गुप्ता जिसकी उम्र महज 14 वर्ष है उसने महज इतनी छोटी सी उम्र में क्रेन मशीन बनाई है जो देखने को में तो काफी छोटी है लेकिन ठीक वैसे ही कार्य करती है जैसे कोई बड़ी क्रेन मशीन । अभिषेक ने जो क्रेन मशीन बनाई है उसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि उसमे पार्ट्स के रूप में सभी दैनिक दिनचर्या के उपयोग की वस्तुएं हैं । चाहे वो मशीन में प्रेशर के लिए प्रयोग किया गया सीरेंज हो या पहियों में लगाया गया रबर का पट्टा । अभिषेक की बनाई क्रेन मशीन हूबहू वैसे ही कार्य करती है जैसे एक बडी मशीन । अभिषेक की मानें तो वह घण्टे भर में

जलियावाला बाग कांड : एक ऐसी घटना जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला

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आलेख - अनुज हनुमत   13 अप्रैल को देश भर में वैसाखी का त्यौहार बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है, लेकिन 1919 का जलियांवाला बाग़ काण्ड भी इसी दिन से जुड़ा हुआ है, जिसने समूचे भारत को हिला कर रख दिया था। जलियांवाला बाग अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास का एक छोटा सा बगीचा है, जहां 13 अप्रैल 1919 को ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने गोलियां चला के निहत्थे, शांत बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों को मार डाला था और हज़ारों लोगों को घायल कर दिया था। अंग्रेजी सेना की कार्रवाई के बाद दो दिनों तक इन शहीदों के शव घटना स्थल पर ही पड़े रहे| जिसके बाद बाग़ से 1200 से 1500 लोगों के शव बरामद किये गए, जबकि बाग़ के कुँए से कम से कम 120 लाशें निकाली गई|   यदि किसी एक घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था, तो वह घटना यह जघन्य हत्याकाण्ड ही था। इसी घटना की याद में यहां पर स्मारक बना हुआ है। गोलीबारी में हुए मृत लोगों की संख्या को लेकर विवाद है। नरसंहार की ब्रिटिश जांच के बाद जो आंकड़े जारी हुए, उसके अनुसार मृतकों की संख्या 379

कांग्रेस सरकार की असफलता का जीता जागता स्मारक : बुन्देलखण्ड की बरगढ़ ग्लास फैक्ट्री

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"दशकों  से बंद है बुन्देलखण्ड की इकलौती ग्लास फैक्ट्री"   बरगढ़ / चित्रकूट        देश का एक ऐसा हिस्सा जहाँ का प्रत्येक गाँव भूख और आत्महत्याओं की दुःख भरी कहानियों से भरा पड़ा है । बुन्देलखण्ड के विकास पर पानी की कमी , भूमि अनुपजाऊ और जनप्रतिनिधियों की असक्रियता तीनों एक साथ प्रहार करते आये हैं । ऐसी ही दशकों पुरानी एक कहानी  बुन्देलखण्ड की इकलौती ग्लास फैक्ट्री की है जिसका शिलान्यास दशकों पहले कांग्रेस की सरकार में हुआ था लेकिन आज तक ये चालू नही हो पाई । जिससे पाठा सहित बुन्देलखण्ड के हजारों मजदूरों का नुकसान हुआ ।  राज्य मिनरल्स डेवलपमेंट कार्पोरेशन के अंतर्गत आने वाली ये फैक्ट्री चित्रकूट जिले के बरगढ़ क्षेत्र में आती है जिसका शिलान्यास सन 1987 में देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कर कमलों द्वारा हुआ था । बुलेट प्रूफ कांच बनाने वाली बुन्देलखण्ड की इस इकलौती ग्लास फैक्ट्री बरगढ़ का निर्माण उप्र राज्य खनिज विकास निगम (यूपीएस एमडीसी) द्वारा सन 1988 में कुछ प्राइवेट सेक्टर के उद्योगपतियों के सहयोग से प्रारम्भ किया गया था । इस फैक्ट्री के निर्माण में प्र

#बुन्देलखण्ड : इस बार भी बेरंग रही पाठावासियो की होली

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मानिकपुर/ पाठा की धरती तीन दशक से भी ज्यादा समय से सूखे की मार झेल रही है । पिछली बार भीषण बाढ़ ने बहुत नुकसान किया । मुआवजे के नाम पर छोटे छोटे सूखे चेक पीड़ितों को पकड़ाये गये । हर बार की तरह खाने के लिए अन्न ज्यादा मात्रा में न पैदा होने के कारण किसानों का ये रंग बिरंगा होली का त्यौहार भी बेरंग ही साबित हुआ । हालत इतनी ख़राब है की गाँवो में पसरा सन्नाटा , घरों में लटके ताले , सूखे पड़े खेत, सूखी नदियाँ, खाली पड़े खूंटे  सारी स्थिति बयां कर रहे हैं ।  कुछ किसानों का कहना था की सोंचा था कि इस बार बारिश अच्छी हुई है तो हँसी खुशी होली मनाएंगे पर स्थिति ज्यादा अच्छी नही रही । सरकारी अमला कुछ भी कहे लेकिन तस्वीरें सब बयां कर रही हैं ।अधिकांश गाँवों में ज्यादातर घर सुनसान पड़े हैं जिसमे एक दुक्का बूढ़े माँ बाप रह रहे हैं और उनमे से ज्यादातर लोग बाहर पलायन कर चुके हैं । पलायन करने वालों में नौजवानों की संख्या काफी ज्यादा है ।  गौरतलब है कि होली का त्यौहार खुशियों लेकर आता है । सभी को आशा रहती है की खुशियों के अलग अलग रंग देखने को मिलेंगे पर यहाँ तो सिवाए निराशा के कोई रंग देखने को न

रिपोर्टिंग के दौरान मारकुंडी के जंगल मे मिले हजारों साल पुराने सभ्यता के निशान

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                               मारकुंडी/चित्रकूट      पाठा क्षेत्र के बीहड़ इलाकों मे रिपोर्टिंग दौरान मुझे और मेरी टीम को मारकुंडी और टिकरिया के बीच पड़ने वाले बड़पथरी के जंगलों हजारों साल पुरानी सभ्यता के कुछ और निशान मिले जो कि एक बड़ी खोज साबित हो सकती है ! इस स्थान पर जो शैलचित्र मिले वो एक बड़े शैलाश्रय पर बने थे । ये हमे अब तक प्राप्त सभी शैलचित्रों में सबसे अनोखा और  खास लगा क्योंकि इसमें बने शैलचित्र जानवरों की लड़ाई से सम्बंधित हैं । इसमें मानव सभ्यता के शुरुआती दौर के कई राज छिपे हो सकते हैं ।  गौरतलब हो कि इससे पहले भी मैंने अपनी रिपोर्टिंग के दौरान सरहट , बांसा ,चूही और करपटिया के आस पास बड़ी संख्या में शैलचित्र प्रकाश में लाये थे ।  आपको बता दें कि मारकण्डेय आश्रम से कुछ ही दूरी पर बगहा जंगलों में एक विशाल शैलाश्रय (चट्टान) पर आदि मानव द्वारा बनाए गये शैलचित्र काफी मात्रा मे मौजूद हैं। मैंने इन शैल चित्रों को प्रकाश में लाकर उन्हें सरंक्षित करने हेतु पीएमओ को पत्र भेजा था । जिसके बाद पुरातत्व विभाग की टीम ने इनमें से कुछ स्थानों का निरीक्षण किया था । पाठा मे हजार

मानिकपुर के सैकड़ो वर्ष पुराने थाने में धूमधाम से मनाया गया शहीद दिवस

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रिपोर्ट - अनुज हनुमत मानिकपुर/चित्रकूट         आज शहीद दिवस के मौके पर मानिकपुर विकास मोर्चा द्वारा नगर स्थित सैकड़ो वर्ष पुराने थाने (ब्रिटिश कालीन थाना जहाँ किसानों-मजदूरों को फांसी दी जाती थी) में भारत माता के अमर सपूतों - 'शहीद भगत सिंह -सुखदेव-राजगुरु' का बलिदान दिवस मनाया गया । मानिकपुर विकास मोर्चा विगत कई वर्षों से लगातार इस शहीद स्थल पर शहीद दिवस मनाता आ रहा है । गौरतलब हो कि देश की आजादी के लिए अपनी जान की बाजी लगने वाले अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव को 23 मार्च 1931 को अंग्रेजों ने फांसी दे दी थी। इस अवसर पर आज पीएम मोदी ने भी ट्वीट कर शहीदों को याद किया। उन्होंने लिखा कि देश उनके बलिदान और साहस को कभी नहीं भूल सकता।  सबसे खास बात यह है कि भारत माता के अमर सपूत जिन्होंने देश की आजादी के खातिर अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया उनसे जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को सहेजने की जरूरत है । ऐसे ही अंग्रेजों के समय की जेल मानिकपुर में थी जो आज सरकार की उदासीनता के चलते लगभग धूल धूसरित हो गया है । इन्ही में से एक मानिकपुर ब्लाक संसाधन केंद्र के ठीक पीछे पड़ा खंडहर ज

जब निरीक्षण के दौरान खुद परिवहन मंत्री ने बस में चढ़कर आम यात्रियों से पूछी उनकी समस्याएँ

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रिपोर्ट - अनुज हनुमत  लखनऊ / ऐसा नजारा बहुत ही कम देखने को मिलता है जब जनता के सेवक (मंत्री , प्रशासनिक अधिकारी) अपने वातानूकुलित चैम्बर से निकलकर जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएँ सुनते दिखे । लेकिन कभी कभार कुछ जनसेवक अपने सादगी भरे कार्यों से जनता के दिल में स्वतः अपनी जगह बना लेते हैं । ऐसा ही एक नजारा कल उत्तर प्रदेश के नवनियुक्त राज्यमंत्री (परिवहन विभाग) स्वतंत्रदेव सिंह ने अचानक परिवहन विभाग से सटे बस अड्डे में पहुंचकर औचक निरीक्षण के दौरान पेश किया । उन्होंने निरीक्षण के दौरान परिवहन मंत्रालय के अन्तर्गत आरटीओ विभाग में कर्मचारियों एवं अधिकारियों से वार्तालाप एवं मिलने के बाद केसरबाग़ बसअड्डे जाकर बसों एवं बस अड्डे का निरीक्षण किया | साथ ही उन्होंने आरटीओ के अधिकारियों से मिलकर स्थिति का जायजा भी लिया |  शाम तक जैसे ही ये सूचना उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट में डाली वैसे ही देखते ही देखते लोगो ने शेयर करना शुरू कर दिया । कुछ लोगों ने पोस्ट शेयर करते हुए तो यहाँ तक लिख डाला कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी परिवहन मंत्री ने बस में चढ़कर आम लोगों की समस्याएं

#बलिदान दिवस : कलम का ऐसा सिपाही जिसने अपनी अंतिम सांस भी पत्रकारिता के नाम कर दी

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     आज 25 मार्च के ही दिन गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे महान शख्सियत ने देश की अखण्डता को बनाये रखने के लिए अपना बलिदान दिया था । आज वो हमारे बीच नही हैं पर उनके बताये गए आदर्श व् सिद्धांत जरूर आज भी हमें मजबूती प्रदान करते हैं । गणेश शंकर विद्यार्थी भारतीय पत्रकारिता के पितामह हैं । वो अक्सर कहा करते थे की समाज का हर नागरिक एक पत्रकार है इसलिए उसे अपने नैतिक दायित्वों का निर्वाहन सदैव करना चाहिए । गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता को एक मिशन मानते थे पर आज के समय में पत्रकारिता मिशन नही बल्कि इसमें बाजार हावी हो गया है जिसके कारण इसकी मौजूदा प्रासंगिकता खतरे में है । गणेशशंकर विद्यार्थी आज ही के दिन 25 मार्च सन 1931 को कानपुर के हिन्दू-मुस्लिम दंगे में निस्सहायों को बचाते हुए साम्प्रदायिकता की भेंट चढ़ गए थे। इसी दंगे में उनकी मौत हो गई। सबसे ज्यादा दुःख यह था कि उनका शव अस्पताल में लाशों के ढेर में पड़ा मिला। वह इतना फूल गया था कि पहचानना तक मुश्किल था। नम आँखों से 29 मार्च को विद्यार्थी जी का अंतिम संस्कार कर दिया गया। गणेशशंकर विद्यार्थी एक ऎसे साहित्यकार रहे, जिन्होंने देश में अप

यूपी का योगी मंत्रीमण्डल

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यूपी का योगी मंत्रीमण्डल :मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ,उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य और दिनेश शर्मा सहित सुपर-47 की टीम इस प्रकार है -   22 कैबिनेट मंत्रियों ने ली शपथ :- ●सूर्य प्रताप शाही यूपी बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं और राज्य में बीजेपी के कद्दावर माने जाते हैं। ●सुरेश खन्ना कैबिनेट मंत्री बने हैं। उन्हें RSS का करीबी माना जाता है। ●स्वामी प्रसाद मौर्य को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है। वे बीएसपी छोड़कर बीजेपी में आए थे। ●सतीश महाना कैबिनेट मंत्री बने हैं। कानपुर से 7 बार विधायक बने हैं। ●राजेश अग्रवाल कैबिनेट मंत्री बने हैं।  बरेली कैंट से विधायक बने हैं। अमित शाह और योगी के करीबी माने जाते हैं। ●रीता बहुगुणा जोशी को कैबिनेट मंत्री का तोहफ़ा मिला है। चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आईं थी। ●दारा सिंह चौहान मऊ की मधुबनी सीट से चुनाव जीते हैं। 2015 में बीएसपी छोड़कर बीजेपी में आए थे। ●धर्मपाल सिंह राजनाथ सिंह और अमित शाह के करीबी माने जाते हैं। बीजेपी में पिछड़ी जाति के चेहरे हैं। ●एस पी सिंह बघेल टूंडला विधानसभा सीट से बीजेपी के विधायक हैं। एसपी से बगा

जयंती विशेष : आज भी हमारे बीच हैं मजबूत इरादों की कल्पना !

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       एक ऐसी भारतीय महिला जिसने अपने मजबूत इरादों से पूरे विश्व में ये साबित कर दिया कि जब आप कोई कार्य पूरी लगन के साथ करते हैं तब आप उसमे सफल होते हैं । यूँ तो दुनिया में सभी लोगों को एक न एक दिन इस खूबसूरत जहां को अलविदा कहना होता है, लेकिन दुनिया में कुछ लोग सिर्फ जीने के लिए आते हैं, मौत महज उनके शरीर को खत्म करती है।  ऐसे ही जांबाजों में से एक भारत की बहादुर  बेटी  कल्पना चावला थीं । आज ही के दिन इस जाबांज बेटी ने जन्म लिया था । जो अंतरिक्ष की यात्रा करने वाली पहली भारतीय महिला थी ।  भले ही 1 फरवरी 2003 को कोलंबिया स्पेस शटल के दुर्घटनाग्रस्त होने के साथ कल्‍पना की उड़ान रुक गई लेकिन आज भी वह दुनिया के लिए एक मिसाल है । जानकारी के लिए आपको बता दें कि नासा वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री  कल्पना चावला  का जन्म (17मार्च 1962-1 फरवरी 2003) हरियाणा के करनाल में हुआ था. कल्पना अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय (उन्होंने अमेरिका की नागरिकता ले ली थी)  महिला  थी । उनके पिता का नाम बनारसी लाल चावला और मां का नाम संज्योती था ।  शुरुआती पढ़ाई करनाल के टैगोर बाल निकेतन में हुई।

महिला दिवस विशेष : पूज्य माता श्री को प्रेषित पत्र ...

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दोस्तों आज पूरा विश्व  # महिला_दिवस  मना रहा है और सभी अपने अपने तरीके से इस पवित्र दिन को हर कदम पर साथ देने की कसम के साथ यादगार बनाना चाहता हैं और आज के दिन मैं भी इस दिन विशेष में बहुत से तथाकथित समाज के चिंतको के जैसे नकारात्मक बातें नही करूँगा बल्कि आज का ये पावन दिन मैं भी अपनी माँ को समर्पित करूँगा - मैं अभी तो अपनी माँ से 100 किमी दूर इलाहाबाद में हूँ पर आज मैं इस पवित्र दिन अपनी माता जी को अपना ये पत्र आप सभी के माध्यम से प्रेषित कर रहा हूँ - मेरी प्रिय माता श्री ,     प्रणाम ! मुझे भी सभी की तरह नही याद पर विश्वास है की मैंने भी अपने मुख से सबसे पहले माँ शब्द ही बोला होगा और आपने ने मुझे झट से अपनी गोद में उठाकर अपने आँचल से लगाया होगा ।सभी शास्त्र और विद्वानों का कहना है की 'माता ही एक बच्चे की प्राथमिक पाठशाला' होती है और इसका एहसास मुझे आज होता है जब मैं इस समाज रूपी माले में खुद को संस्कार रूपी मोतियों से पिरोया हुआ पाता हूँ । एक स्त्री को अपने जीवन में कई तरह के रिश्ते निभाने पड़ते हैं और हर रिश्ते में आप एक स्त्री को उसी विस्वास और समर्पण रूपी स्वरुप