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Showing posts from March, 2016

यूपी में भाजपा को भरनी होगी युवा नेतृत्व के साथ वही पुरानी उड़ान ,सुधारनी होगीं ये गलतियाँ

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पिछले कुछ दिनों से देख रहा हूं कि यूपी में भाजपा अपने संगठनात्मक फेरबदल को लेकर काफी व्यस्त थी और मंडल स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक बड़ी मात्रा में युवाओं की दावेदारी ने पार्टी आलाकमान की मुश्किलें और भी बढ़ा दी हैं, क्योंकि पार्टी के सामने सबसे बड़ी समस्या ये है की किसको ज्यादा तवज्जो दे_'पार्टी के पुराने सिपाहियों को' या 'पार्टी के नये सिपाहियों को' । दरअसल पार्टी में इस समय दो धड़े हैं, एक वह जिसका नेतृत्व पार्टी के बुजुर्ग नेता कर रहे हैं और जिन्होंने पार्टी की नींव को अपने खून-पसीने से सींचा है और जो किसी भी हालत में अपनी जगह नही गंवाना चाहते और दूसरा धड़ा उन नौजवानों का है, जिसका नेतृत्व पिछले लोकसभा चुनावो में अपनी चमक बिखेरने वाले 'युवा' कर रहे हैं, वे इसी दरवाजे से अब सक्रीय राजनीति में मजबूती से दाखिल होना चाहते हैं। यूपी में  चल रहे भाजपा के संगठनात्मक चुनावों की स्थिति यही नहीं ठहरती, बल्कि अभी और भी पेंच सामने आ रहे हैं, जिसमें मंडल स्तर और जिले स्तर में 'जातिवाद' का जहर भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जिसमें कार्यकर्ता अपने पारस्परिक व्यवहा

" प्रेम तो गीत है मधुर आत्मा से गाये जाओ."

   कहते हैं प्रेम की न तो कोई परिभाषा होती है न तो इसे किसी प्रकार के बन्धन से बांधा जा सकता है । प्रेम तो वो एहसास जो दो दिलों को आपस में जोड़ता है । इसमें आकर्षण नही होता है बल्कि समर्पण का ऐसा भाव होता है जिसमे डूबकर प्रेम करने वाला सबकुछ अर्पण कर देता है । प्रेम का कोई आकार नही होता न तो प्रेम दोनों हांथो से समेटा जा सकता है । हाँ प्रेम में एक स्वार्थ होता है जिसके द्वारा प्रेम करने वाला अपने प्रिय को अपने पास सहेज कर रखना चाहता है जिसे गलत नही कहा जा सकता है। ऐसी ही एक प्रेमिका थी कृष्णभक्त मीराबाई जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन कृष्ण भक्ति में लगा दिया ।   मीरा बाई जिनका जन्म राव रत्न सिंह के घर 23 मार्च 1498 ई को हुआ था । बचपन में एक विवाह समारोह के दौरान मीरा ने अपनी माँ  से पूछा की मेरा पति कौन होगा ? उनके द्वारा बार-बार पूछे जा रहे इस सवाल से परेशान माँ ने भगवान् श्रीकृष्ण का ना ले लिया ।    इसके बाद मीरा ने उन्हें दिल से पति रूप में स्वीकार कर लिया । माता पिता की मृत्यु के पश्चात् उनका विवाह चित्तौड़ के प्रतापी राजा राणा सांगा के भाई भोजराज से कर दिया। विवाह के कुछ समय पश्

भावनाओं का मकड़जाल, जो हमें खुशी भी देता है और अवसाद में भी ले जाता है

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कमबख्त ये मनुष्य के भाव ही हैं जो उसे कभी भावविभोर कर देते हैं तो कभी अगले पल अचानक 'भावहीन'। व्यक्तिगत तौर पर मैं भी ऐसी स्थितियों से गुजरता रहता हूँ, इसलिए आज सोचा कि आप सबसे इस विषय पर कुछ बातें साझा कर लूँ। आपसे इस विषय पर आपके तर्क भी समझूं क्योंकि ये भाव ही हैं जो मनुष्य को हर समय अपने बंधन में बांधे रहते हैं, इसलिए इनका महत्व और भी बढ़ जाता है। आखिर इनका जन्म भावनाओं की कोख से ही तो होता है। खैर ये हमारे भाव ही हैं जो हमारे रिश्तो में हर पल नई ऊर्जा भरते हैं और वो भी हमारे भाव ही होते हैं जिसके कारण हमारे रिश्ते मृत होते चले जाते हैं! ये भाव ही होते हैं जिनके कारण हम खुशी से झूम उठते हैं और वो भी हमारे भाव ही होते हैं जिसके कारण हम सब कुछ भूलकर गम में डूब जाते हैं! सोचने वाली बात यह भी है कि आखिर ये भाव आते कहां से हैं और आखिरकार ऐसा कौन सा कार्य किया जाए कि हमारे भाव हमेशा हमें नयी खुशियां प्रदान करते रहें। साथ ही इन भावों से जन्म देने वाली नित नई 'भावनाएं' कैसे स्थिर रहें...? क्या वाकई ऐसा कोई कार्य है जिससे हम ऐसे भावों की खोज कर सकते हैं जिनसे हम हर पल खुश र

खत उस ईश्‍वर के नाम, जिसने दुनिया को बनाया..

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                                                          ®प्रार्थना पत्र® सेवा में ,       श्रीमान् परमपिता परमेश्वर, हे ईश्वर ,       आज मन बहुत दुखित है इसलिए आपको ये पत्र प्रेषित कर रहा हूँ । आशा है आप इसे जरूर पढ़ेंगे । हर बार मौसम की मार किसानों के पेट पर ही क्यों ? जो पसीने की कमाई खाता है / जो जी-तोड़ मेहनत करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता है आखिर उस माटी के लाल का जीवन ही अन्धकारमय करके आपको कौन सी खुशी मिलती है ? आप इस पूरी सृष्टि के रचयिता हैं इसी कारण आपको 'परम पिता परमेश्वर' के नाम से भी जाना जाता है ।आप ही हमारे पालनहार हैं,चलो मान लिया की कुछ पापियों द्वारा इस सुंदर सी धरा को प्रदूषित किया जा रहा है जिससे पूरी सृष्टि के पिता होने के नाते आपका मन दुखित है और आप क्रोधित हैं पर आखिर किसानों से आपकी क्या दुश्मनी ? मैंने हमेशा अपने पूर्वजों से यही सुना था की किसान आपके सबसे प्रिय पुत्रों में से एक हैं पर कभी बेमौसम बरसात तो कभी आंधी तूफ़ान और ओले ! इन सभी से केवल किसान ही प्रभावित क्यों होता है । अगर आपको क्रोध दिखाना ही है तो उन पापियों के ऊपर दिखाइये जो जंगलो

वि का स - 'विचारों का संगम'

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ये हम सब के लिए यादगार पल है क्योंकि हम पांच मित्रों (शशांक मिश्र ,रोहित कुमार, आदित्य गिरी ,अजय सरोज और मैं अनुज हनुमत द्विवेदी ) ने मिलकर खुद चार पन्नो का न्यूजपेपर निकाला है जो 'माघ मेला विशेषांक'  है ! 

अब इलाहाबाद विवि में नया विवाद, छात्रसंघ अध्‍यक्षा के सनसनीखेज आरोप, फिर घिरेगी मोदी सरकार?

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कहावत है कि बहती गंगा में सभी हाथ धोना चाहते हैं। यानी की समय और परिस्‍थिति के हिसाब से सभी अपना काम निकालने में माहिर हैं। मौजूदा समय में देश शिक्षा जगत में यही माहौल चल रहा है। ऐसा लगता है, कुछ तथाकथित अतिबौद्धिक लोगों द्वारा यह जानबूझकर किया जा रहा है। जेएनयू मामला इसी की पहचान है। बहरहाल, बात जेएनयू की ही हो रही है। अभी जेएनयू में लगी आग ठंडी भी नही हुई थी, कि पूरब का ऑर्क्सफ़ोर्ड कहा जाने वाला इलाहाबाद विश्वविद्यालय भी इस आग की चपेट में आ गया है । जेएनयू और हैदराबाद यूनिवर्सिटी के बाद अब इलाहाबाद विवि में विवाद की हवा दिखाई दे रही है। यहां छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन उन्हें पद से हटाना चाहता है। छात्रसंघ की पहली महिला निर्दलीय अध्यक्ष ऋचा सिंह का कहना है कि उन्होंने विश्वविद्यालय में कई मुद्दों के लिए आवाज उठाई थी, जिसकी वजह से प्रशासन उनकी कुर्सी छिनना चाहता है और उनके साथ वैसा ही किया जा रहा है जैसा हैदराबाद यूनिवर्सिटी में रोहित वेमुला के साथ किया गया था। ऋचा का आरोप है कि जेएनयू, रोहित वेमुला के मामले पर आवाज उठाने और एबीवीपी का विरोध करने

जेएनयू मुद्दे से मिल रहे खतरनाक संकेत, कहीं ये खतरा न हो जाए देश के लिए..!

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कहते हैं की जब कहीं भीषण आग लगती है, तो उसकी तपिश आस पास के इलाकों में देखने को मिलती है। जेएनयू की घटना का प्रभाव वैसे तो देश के कई भागों में दिखाई पड़ रहा है और अब इस आग की आंच पहले संगम नगरी इलाहाबाद में भी पहुंची, जहां पटियाला कोर्ट में वकीलों द्वारा किए गए बवाल को दोहराया गया। बस अंतर इतना था की वहां वकीलों ने आरोपी कन्हैया के साथ मारपीट की थी, और यहां वकीलों ने वामपंथियों के कुछ सहयोगी संगठन, जो आरोपियों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे थे, उनके साथ मारपीट की। इस घटना को भी विस्तार से जानना आवश्यक है  क्योंकि इसका मूल विषय एक ही है। जिला अदालत के वकीलों ने गुरुवार को कुछ लोगों के समूह को कथित तौर पर पीटा, जो जेएनयू में छात्र नेताओं पर राजद्रोह के आरोप लगाए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। करनैलगंज पुलिस थाने के प्रभारी समीर सिंह ने बताया कि यह घटना दोपहर में हुई। वकीलों के एक समूह ने प्रदर्शनकारियों को पीटा। प्रदर्शनकारियों में वाम दलों से संबद्ध ट्रेड यूनियन नेता और छात्र नेता थे, जो जेएनयूएसयू के अध्यक्ष कन्हैया कुमार के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का विरोध कर रहे थे। प्रश